Computer Kya Hai कंप्यूटर क्या है ? Generation, Use And Types Of Computer

Computer Kya Hai

दोस्तों आप सभी ने कही न कही कप्यूटर (Computer) देखा होगा या कम से कम कप्यूटर (Computer) का नाम तो जरूर सुना होंगा। और इसे लेकर आपके मन में कई सवाल भी उठते होंगे। जैसे Computer Kya Hai कंप्यूटर क्या है ? Types Of Computer कंप्यूटर कितने प्रकार के होते है। कंप्यूटर कैसे काम करता है How does computer work? कंप्यूटर का विकास कैसे हुआ ? Generation Of Computer आदि कंप्यूटर से जुड़े बहुत से सवाल जिनका, सभी का जवाब आपको आज के इस पोस्ट में मिलेगा, क्योकि आज की इस पोस्ट में मै आपके साथ कंप्यूटर के बारे में सभी बेसिक जानकारिया साँझा करने जा रहा हूँ और मुझे उम्मीद है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको कंप्यूटर (Computer) के बारे में अधिक ज्ञान प्राप्त हो जायेंगा।

Introduction For Computer कंप्यूटर का परिचय

दोस्तों कम्प्यूटर (Computer) पिछली सदी की एक महानतम खोज है ,आज का युग एक कम्प्यूटर का युग है, आधुनिक समय तकनीकी के आधार पर आज इतना ज्यादा विकिसित हो गया हैं की हमारे कोई भी काम चुटकियो में हो जाते हैं, हमारे जीवन की प्रक्रिया में कंही न कही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम्प्यूटर का समावेश जरूर होता है। आज बड़े पैमाने पर इसका उपयोग होने लगा है और यह एक शक्तिशाली मशीन के रूप में उभर कर आया है।

आज कम्प्यूटर (Computer) सरल गणनाओं, दुनिया भर के ट्रैफिक सिग्नलों का प्रबंधन, स्वचालित टेलर मशीन (एटीएम), बड़े स्टोर से लेकर हमारे किराने के बिल की गणना, बैंक, रेलवे, स्कूल, हॉस्पिटल, रिसर्च सेंटर, आदि कई जगहों पर कंप्यूटर के उपयोग ने हमारे जीवन को अधिक सरल बना दिया है।

कम्प्यूटर (Computer) की उत्पति “कम्प्यूट” शब्द हुई हैं जिसका अर्थ हैं “गणना करना”। दुनिया में पहला कंप्यूटर 1822 ई. में, ब्रिटिश गणितज्ञ और आविष्कारक चार्ल्स बैबेज 1791-1871 ने भाप से चलने वाले स्वचालित यांत्रिक कैलकुलेटर का निर्माण कर बनाया था जिसे उन्होंने “Difference Engine” या “डिफरेंशियल इंजन” का नाम दिया था। और यही से कंप्यूटर का विकाश प्रारम्भ हुआ माना जाता है। और पहली बार कंप्यूटर बनाने के लिए “चार्ल्स बैबेज” को “कंप्यूटर का जनक” भी कहा जाता है।

चाल्स बैबेज द्वारा बनाया गया डिफरेंशियल इंजन (Difference Engine) साधारण कैलकुलेटर की तुलना में अधिक प्रभावी था। यह आटोमेटिक मैकेनिकल कैलकुलेशन करता था और इसी परआधारित था। आज के समय का कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जो अंकगणितीय कार्यों को बहुत शीघ्र उच्चगति से करता हैं जो प्राचीन मान्यता प्राप्त कम्प्यूटर से कही ज्यादा बेहतर कार्य करते हैं। लेकिन इसके विकाश में वैज्ञानिको ने अपना सहयोग, समय और बहुत अधिक परिश्रम दिया है।

कंप्यूटर की परिभाषा (Definition Of Computer In Hindi)

कंप्यूटर एक ऐसे इलेक्‍ट्रॉनिक मशीन है जो जानकारियों को संचित करने, ढूँढ़ने व व्‍यवस्थित करने, परिकलन करने व अन्‍य मशीनों पर नियंत्रण रख पाने में सक्षम है।

अधिक सरल भाषा में कहे तो “कंप्यूटर एक Electronic data processing machine हैं जो User से इनपुट के रूप में डेटा लेता हैं उस डेटा को सेव करता हैं उस डेटा को Process करके जो भी रिजल्ट आता हैं उसको Output के रूप में यूज़र को दे देता हैं”

आइये इसे एक उदाहरण से समझते है मान लीजिये आप कंप्यूटर में किसी दो संख्याओं को जोड़ना (sum) जाहते है। तो यहाँ आप यूजर (User) हो गए अब जिन दो संख्याओं को आपस में जोड़ना है वो संख्या आपको कंप्यूटर (Computer) को बतानी होंगी। यह संख्या इनपुट डेटा (input data) हो गया। अब कंप्यूटर इन दो संख्याओं को आपस में जोडेंगा जिसे प्रोसेसिंग (Processing) कहते है। और जब कंप्यूटर इन दो संख्याओं को आपस में जोड़कर इसका रिजल्ट (result) आपको बतायेंगा उसे हम ऑउटपुट (Output) कहेंगे।

कंप्यूटर का पूरा नाम क्या (Full Form Of Computer In Hinidi)

दोस्तों कई लोग Full Form Of Computer In Hinidi जानने के इच्छुक होते है। वैसे तो कंप्यूटर का कोई स्टैंडर्ड फुल फॉर्म नहीं हैं मगर कंप्यूटर का एक Full Form काफी प्रसिद्ध हैं और वो कंप्यूटर का फुल फॉर्म हैं – “Commonly Operated Machine Particularly Used Technical Educational Research”

C Commonly
O Operated
M Machine
P Particularly
U Used
T Technical
E Educational
R Research

Computer ko hindi me kya kehte कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते है ?

यह भी एक बड़ा सवाल लोगो के मन में होता है की आखिर कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते है (Computer ko hindi me kya kehte) तो दोस्तों मै आपको बताना चाहूंगा की कंप्यूटर को हिंदी में “संगणक” कहा जाता है। दोस्तों यह सवाल कई बार परीक्षायो और interview में पूछ लिया जाता है।

कंप्यूटर का विकास कैसे हुआ (Development Of Computer In Hindi)

मानव में आदि काल से ही कुछ नया करने की जिज्ञासा रही है और यह आज भी बरकरार है। प्राचीन काल में जब लोगो के पास गणना करने के लिए कोई साधन नहीं था तो वह पत्थर, हड्डियों, लाठी, पेड़ और फल का सहारा लेकर गणना करते थे।

यही गणना करने के तरीके समय के साथ बदलते गए और धीरे-धीरे गणना का रूप मशीनों ने ले लिया अबेकस (Abacus) एक ऐसे ही मशीन थी जिसे गणना करने के लिए सबसे पहले उपयोग में लाया जाने लगा। जिसके बाद और सुधार होते गए और slide rule (1622), Pascaline (1642), arthrometer (1820), difference Engine (1822) जैसे कई गणना यंत्र आये जिन्होंने कंप्यूटर जैसे शक्तिशाली मशीन के निर्माण के बारे में वैज्ञानिको को सोचने पर विवस किया किया और धीरे-धीरे अधिक सुधार होते गए और कंप्यूटर (Computer) अस्तित्व में आया।

कंप्यूटर के प्रमुख भाग (Major Parts Of Computer)

  • Input Device यह यूज़र या उपयोगकर्ता को कंप्यूटर में इनपुट करने में मदद करता है जैसे कि कीबोर्ड, माउस।
  • Output Device – यह यूज़र को आउटपुट दिखाने में मदद करता है जैसे कि मॉनिटर।
  • Storage Device यह डेटा को स्थाई रूप से कंप्यूटर में स्टोर करता है जैसे कि हार्ड डिस्क।
  • Memory – यह प्राइमरी मेमोरी है जो CPU और Storage के बिच डेटा ट्रांसफर का काम करता हैं।
  • Motherboard – ये कंप्यूटर का मुख्य पार्ट है जो कंप्यूटर के बाकि हिस्सों को जोड़े रखता हैं।
  • Processor – यह हार्ड वेयर और सॉफ्टवेयर के निर्देशों (Instructions) को निष्पादित (execute) करता हैं। इसे CPU ( Central Processing Unit) भी कहा जाता है। यह कंप्यूटर का ब्रेन होता है।

कम्प्यूटर की प्रमुख विशेषताए Key Features of Computer

  • स्वचालित ( Automatically ) : कम्प्यूटर एक ऑटोमैटिक मशीन हैं एक बार इसे अनुदेश या निर्देश दे देने के बाद वह तब काम करता रहेगा कब तक की रुकने का आदेश न मिल जाये, इस तरह मानव हस्तक्षेप की जरूरत कम पड़ती हैं और समय की बचत होती हैं।
  • गति (speed ) : कंप्यूटर एक उच्चत्तम गति की मशीन है। यह उन सूचनाओं, आकड़ो को सेकंडो में हल कर देता है जिन्हे करने के लिए मनुष्य को अधिक समय लगे।
  • शुद्धता (Accuracy ) : शुद्धतापूर्वक कार्य करना कंप्यूटर की प्रमुख विशेषता है। कंप्यूटर कार्यो में किसी प्रकार की अशुद्धता (गलती) की कोई सम्भवना नहीं होती है। कहने का मतलब कंप्यूटर कभी गलतिया नहीं करता है। हाँ यदि कही गलती होती है तो उसका कारण मानव द्वारा निर्मित गलत प्रोग्राम या गलत आकड़ो को इनपुट करना होता है।
  • दृढता (consistency ) : एक कंप्यूटर घंटो तक बिना थके, बिना रुके तटस्थता एवं भावना विहीन हो कर कार्य कर सकता है।
  • चपलता (versatility) : कंप्यूटर का एक महानगुण है। यह बिना किसी देरी के प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तुरंत कोई भी परिणाम हमारे सामने पेश करने की योग्यता रखता है।
  • स्मरण योग्यता ( Remembrance Power ) : मानव मष्तिस्क की प्रकति भूलने वाली होती हैं एवं हम कुछ समय खास बातो को ही ध्यान रख सकते हैं जबकि इसके विपरीत कंप्यूटर की स्मरणशक्ति किसी भी स्थिति में बहुत अधिक होती है एवं कंप्यूटर में स्टोर की गयी किसी भी सुचना को बिना किसी देरी के जब चाहे उपयोग में लाया जा सकता है।
  • उच्च संग्रह क्षमता ( high storage capacity ) : एक कंप्यूटर सिस्टम की डाटा की संग्रहण क्षमता बहुत उच्च होती है कंप्यूटर लाखों शब्दों को बहुत कम जगह में संग्रहित करके रख सकता है यह सभी प्रकार के चित्र, प्रोग्राम, गेम्स तथा आवाज को कई वर्षों तक संग्रहित कर के रख सकता है हम जब चाहे उस सुचना को कुछ समय में प्राप्त कर उपयोग कर सकते हैं।

कंप्यूटर की सीमाएँ (Limitation Of Computer In Hindi)

दोस्तों संसार की कोई भी मशीन, व्यक्ति या वास्तु हो उसके कुछ अच्छे गुण होते है तो कुछ सीमाएं भी होती है। आइये जानते है कंप्यूटर की लिमिटेशन के बारे में की अभी तक के कंप्यूटर क्या नहीं कर सकते।

  1. No Intelligence (कोई बुद्धिमत्ता नहीं) – कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है जो अपने आप कोई निर्णय नहीं ले सकता है। कंप्यूटर से हमें कोई भी कार्य करवाना हो तो उसके लिए उसे निर्देश देने होते है। किसी सॉफ्टवेर की मदद से कोई कार्य हो रहा तो ध्यान दे की वह सॉफ्टवेर कंप्यूटर को निर्देश देता है और ऐसे सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम मानव निर्मित ही होते है।
  2. Dependency (निर्भरता) – कंप्यूटर इंसानों पर निर्भर है क्योकि अगर हमें कम्प्यूटर से कोई काम कराना होता हैं तो उसे एक एक स्टेप क्रमशः बताना पड़ता है। साथ ही अगर कंप्यूटर में इलेक्ट्रिसिटी न हो तो भी कंप्यूटर कार्य नहीं कर सकता इसे समय समय पर electricity भी देना होता है। इस तरह कंप्यूटर को कार्य करने के लिए बिजली पर भी निर्भर रहना होता है।
  3. No Feeling (कोई अहसास नहीं) – कंप्यूटर मनुष्य के विपरीत स्वाद, अनुभव, अहसास, ज्ञान या महसूस कर निर्णय नहीं लेता है। कंप्यूटर के अंदर किसी प्रकार की भावना नहीं होती। वह सभी को एक जैसा ही समझता है जबतक उसके लिए कुछ विशेष निर्देश न दिए गए हो। मनुष्य जिस तरह अपने अनुभवों से सीखते हैं और अपने कार्य या जीवन में सुधार लाता है उस तरह कंप्यूटर अपने अनुभवों से नहीं सिख सकता। हलाकि ऐसे टेक्नोलॉजी पर कार्य शुरू है और भविष्य में हमें ऐसे कंप्यूटर देखने को मिल सकते है।

कंप्यूटर की पीढ़ियां (Generations Of Computers)

असल में जैसा कंप्यूटर (Computer) हम आज देख रहे है यह शुरू से ऐसे नहीं था। पहले के कंप्यूटर आकर में बहुत बड़े, धीमी गति से चलने वाले और उनमे आज के मुकाबले बहुत सारी कमियाँ हुआ करती थी। जो पीढ़ी दर पीढ़ी सुधार में आया और हम आज का जो कम्प्यूटर देख रहे है उसे विकशित करने में पीढ़ी दर पीढ़ी जो सुधार हुए उनके बारे जानते है।

पहली पीढ़ी (First Generation Computer)

1943-46 Eniac – Electronic Numerical Interactor & Calculator यह पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था। जिसे अमेरिका में जे. प्रिस्पर एकवर्ट और माऊचली द्वारा रक्षा उद्देश्यों से तैयार किया गया था। इस कम्यूटर को तैयार करने में वैक्यूम ट्यूब्स ( डायोड और ट्रायोड ) का इस्तेमाल किया गया था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग बहुत ही कठिन थी और यह स्टोर प्रोग्राम के सिद्धांत पर काम करती थी। इस जेनेरशन का मुख्य कम्प्यूटर इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटिग्रेटेर और कैलकुलेशन था।

1946-52 EDVAC (Electric Discrete Variable Auto Computer) यह कंप्यूटर जॉन वानं न्यूमेन द्वारा तैयार किया गया था। इस प्रकार का कंप्यूटर अपनी मेमोरी मे डेटा और प्रोग्राम्स को स्टोर करने में सक्षम था। इस कंप्यूटर को तैयार करने में भी वैक्यूम ट्यूब्स का उपयोग किया गया था। यह पहला डिजिटल कंप्यूटर कहा जा सकता है जिसमे बायनरी डिजिट्स ( 0 एवं 1 ) का उपयोग किया गया था।

1951 UNIVAC – Universal Automatic Computer – यह पहला डिजिटल कंप्यूटर था जिसे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार किया गया था। इस कंप्यूटर का उपयोग सबसे पहले जनरल इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन में 1954 में व्यावसायिक उदेश्य से किया गया था। इसके पश्चात आईबीएम IBM कंपनी ने इसी को सुधार कर बाजार में प्रस्तुत किया। इस प्रकार प्रथम पीढ़ी के कम्पूटरो में वैक्यूम ट्यूब का उपयोग किया गया , इनमें प्रोगामिंग के लिए असेम्ब्ली लैंग्वेज का उपयोग किया गया। ये कंप्यूटर आकार में बड़े एवं परिवर्तन की दृष्टि से अनुपयोगी थे साथ ही ये कंप्यूटर अधिक मात्रा में गर्मी उत्पन्न करते थे किसके लिए वातानुकूलन ( Air Conditioning ) आवश्यक था।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर की मुख्य विशेषताए इस प्रकार हैं The main features of first generation computers

  • यह आकर में बहुत बड़े थे।
  • प्राइमरी मेमोरी बहुत ही सीमित थी।
  • ये कंप्यूटर स्टोरेज प्रोग्राम सिद्धांत पर कार्य करते थे।
  • इन कम्प्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमता बहुत कम होती थी।
  • इस जेनेरशन के कम्प्यूटर की भाषा मशीनी भाषा (MASHINE LANGUAGE ) थी।
  • इनपुट और आउटपुट के लिए पंच कार्ड (PUNCH CARD) का उपयोग किया जाता था।
  • इन कंप्यूटर को चलाने पर अधिक इलेक्ट्रिसिटी ऊर्जा खर्च होती थी।
  • प्राइमरी मैमोरी के लिए मैगनेटिक ड्रम का प्रयोग किया जाता था।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (Second Generation Computer)

1956 -64 IBM , 1620, 7090, 70941 CDC -1604 , PDP – 1,5,8 – दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटरों में ट्रांज़िस्टर्स का उपयोग किया गया था। ट्रांसिस्टर का विकास JOHN BURDIN और WILLIAM B SHOCKLEY अदि ने अमेरिका की बेल प्रयोगशाला में किया। फेराइट कोर का उपयोग मुख्य मेमोरी के लिए किया जाता था, इसी प्रकार सेकेंडरी मेमोरी के लिए मैग्रेटिक टेप अथवा डिस्क या ड्रम का उपयोग किया गया। इस कम्पूटरो में प्रोगरामिंग के लिए हाई लेवल लैंग्वेज आदि का प्रयोग किया गया था।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कम्पूटरो की तुलना में अधिक तेजी से कार्य करने के साथ ही आरामदायक भी थे। इन कम्प्यूटरों द्वारा पहले कम्प्यूटरों की तुलना में कम गर्मी उत्पन्न हुई। परन्तु वातानुकूलन (Air conditioning ) फिर भी आवश्यक पड़ती थी इस समय का कंप्यूटर का उपयोग बिज़नेस तथा इंडस्ट्री में किया गया।

दुसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की मुख्य विशेषताए इस प्रकार हैं –

  • ये कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कम्पूटरो से कीमत में कम थे।
  • ये कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कंप्यूटर से आकर में छोटे तथा वजन में हल्के थे।
  • इन पीढ़ी के कम्पूटरो में वैक्यूम ट्यूब के जगह ट्रांसिस्टर का प्रयोग किया गया था।
  • इन कप्यूटर की गति पहली पीढ़ी के कंप्यूटरो की गति से कहीं अधिक थी।
  • प्राइमरी मैमोरी के रूप में Magnetic cores का प्रयोग किया जाता था।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा असेम्ब्ली भाषा तथा हाईलेबल भाषा थी।
  • इन कम्प्यूटर में स्थाई रूप से डेटा स्टोर करने लिए Magnetic tape को प्रयोग में लाया गया था।

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ( Third Generation Computer ) (1964- 71)

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव हुआ इसमें इंटीग्रेटेड सर्किट्स का उपयोग प्रारंभ हुआ जो सिलिकॉन चिप पर बना था। ये अपेक्षाकृत कम गर्मी पैदा करते थे । इनकी गति पर्याप्त तेज थी एवं अधिक छोटा होने के कारण सुविधाजनक व् विश्वसनीय हो गए थे। इसी के साथ इनके रखरखाव के लिए विशेष इंतजाम की आवश्यकता थी।

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की मुख्य विशेषताए इस प्रकार हैं –

  • यह कंप्यूटर दूसरी पीढ़ी कि तुलना में कीमत में सस्ते थे।
  • इंटीग्रेटेड चिप के प्रयोग के कारण आकर में काफी छोटे हो गए।
  • इंटीग्रेटेड चिप के प्रयोग कारण प्राइमरी मैमोरी कपैसिटी काफी बड़ गई।
  • इन कंप्यूटरो ने ट्रांसिस्टर के जगह पर सिंगल चिप का प्रयोग किया गया।
  • इन कम्प्यूटर्स की डाटा प्रोसेसिंग की गति दूसरे पीढ़ी के अपेक्षा काफी तेज थी।
  • इन कंप्यूटर में हाईलेबल लैंग्वेज का प्रयोग आसानी से किया जाने लगा।

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (Fourth Generation Computer)

चौथी पीढ़ी के कम्यूटरो में वैरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन तथा माइक्रोप्रोसेसर चिप का प्रयोग किया गया। इसमें लार्ज स्केल इंटीग्रेशन हुआ है। माइक्रोप्रोसेसर का विकास संपूर्ण सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के सिंगल चिप पर डिजाइन होने पर संभव हुआ इस कार्य को VLSI के विकास ने संभव बनाया। इंटेल कारपोरेशन (USA) ने 1971 में मइक्रोप्रोसस्सिंग चिप का विकास किया। इन्हें कम रखरखाव की एवं आकर और अधिक छोटा होने के कारण इनकी गति व उपयोगिता में वर्द्धि हुई।

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर की मुख्य विशेषताए इस प्रकार हैं –

  • इन कंप्यूटर में VLSI का प्रयोग आंतरिक OPERATION करने के लिए किया जाने लगा।
  • इन कम्प्यूटरों में MICROPROCESSOR का प्रयोग किया जाने लगा।
  • इनको ऑपरेट करना भी काफी आसान था।
  • चतुर्थ पीढ़ी का मुख्य कंप्यूटर IBM – PC था।
  • इन कम्प्यूटरों की DATA प्रोसेसिंग की क्षमता तथा DATA STORAGE अधिक थी।
  • इनका एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण करना आसान था।
  • इनको ऑपरेट करना भी काफी आसान था।
  • इस पीढ़ी के कम्प्यूटर आकर में काफी छोटे हो गए ,जैसे – DESKTOP COMPUTER , LAPTOP (PC)

पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर (fifth Generation Computers)

इसमें बहुत ही बड़े पैमाने पर इंटीग्रेशन का उपयोग हुआ। इनमें कृतिम समझदारी का उपयोग किया गया। इन्हें मानव की तरह संवेदी व समझदार बनाया गया ताकि कंप्यूटर मनाव की तरह सोच सके समज सके और मानव की तरह काम भी कर सके, ये स्वयं निर्णय लेने के सक्षम हैं। ये कंप्यूटर आधुनिक कंप्यूटर हैं एवं वर्तमान में भी इनमें विकास की प्रकिया सतत जारी है। इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर प्रकार हैं –

  • डेस्कटॉप
  • लैपटॉप

पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर की मुख्य विशेषताए इस प्रकार हैं –

  • ULSI तकनीक ,सच्ची कृत्रिम बुद्धि का विकास।
  • पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटरों के आंतरिक ऑपरेशन Very Large Scale intergrated circuit ( VLSI ) तकनीक का प्रयोग किया गया है।
  • इन कम्प्यूटरों की processing क्षमता काफी अधिक है। इनकी गति पिको सेकेंड तथा नेनो सेकंड में मापी जाती है।
  • इन कम्प्यूटरों में निर्णय लेने की क्षमता है क्योकिं इनके कृतिम बुद्धिमता ( artificial intelligence ) है।
  • रोबोटिक, तंत्रिका जाल, गेम खेलना, वास्तविक जीवन की स्थितियों में निर्णय लेने के लिए विशेषज्ञ प्रणालियों का विकास , प्राकृतिक भाषा की समझ, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण का विकास , समानांतर प्रसंस्करण में उन्नति ,सुपरकंडक्टर तकनीक में उन्नति,मल्टीमीडिया विशेषताओं के साथ अधिक उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस, सस्ती दरों पर बहुत शक्तिशाली और कॉम्पैक्ट कंप्यूटर की उपलब्धता।
  • इस generation में मुख्य कंप्यूटर super computer तथा robots आदि हैं।

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते है? (Types of Computer In Hindi)

कंप्यूटर को अलग अलग मानदंड के आधार पर विभाजित किया जाता है जैसे कि कंप्यूटर के आकर (Size), कार्यप्रणाली, और कार्य के उद्देश्य आदि।

कंप्यूटर के आकर (Size) के आधार पर कंप्यूटर को चार भागों में बाटा गया हैं –

  1. माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
  2. मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
  3. मेनफ़्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer)
  4. सुपर कंप्यूटर (Supercomputer)

कार्यप्रणाली के आधार पर कंप्यूटर के तीन प्रकार होते है।

  1. एनॉलॉग कंप्यूटर (Analog Computer)
  2. डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computer)
  3. हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer)

उद्देश्य (Purpose) के आधार पर कंप्यूटर दो प्रकार के होते है।

  1. जनरल पर्पस (General Purpose)
  2. स्पेशल पर्पस (Special Purpose)

कम्प्यूटर का उपयोग (use of computer)

कम्प्यूटर आज के मानव जीवन में अहम भूमिका निभा रहा हैं इसने हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता को सिद्ध किया हैं. कुछ क्षेत्रों का विवरण निम्लिखित हैं जहा कम्प्यूटर का उपयोग बड़े पैमाने पर हुआ हैं।

कार्यालय व्यावसायिक (office-business)

रोजमर्रा के विभिन्न कार्यो को करने के लिए कार्यालय में कम्प्यूटर का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जैसे ,फॉर्म्स, पत्रों, विविध प्रकार के दस्तावेज, मेमोरेंडम, प्रोजेक्ट रिपोर्ट आदि को कंप्यूटर पर बहुत ही सरलता एवं शीघ्रता से तैयार किया जा सकता है। इस कार्य के लिए वर्ड , स्प्रेडशीट (एक्सेल) इसके साथ ही कम्पनी अपने आवश्यकताओ के अनुसार अप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बनवा कर कार्य कर सकते है। जिससे कम्पनी का डाटा सुरक्षित रहता हैं गोपनीयता बनी रहती और एकाउंट्स ,पेरोल ,मार्किट रिसर्च मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम इत्यादि विभिन्न कार्यो हेतु बहुत उपयोगी हैं।

प्रकाशन एवं मुद्रण (Publishing & Printing) डीटीपी

कंप्यूटर के उपयोग से अभूतपूर्व क्रांति आ गयी है। आज सभी तरह के ब्रोशर, फार्म, पत्र, बुक्स, विजिटिंग कार्ड्स आदि की डिजाइनिंग नए-नए सॉफ्टवेयर जैसे कोरल ड्रा, फोटोशॉप, पेजमेकर कवार्क-एक्सप्रेस आदि के माध्यम से बहुत ही आकर्षक रूप में शीग्रतापूर्वक की जा सकती है।

डेटाबेस प्रबंधन (Database Management)

डेटाबेस शब्द के पीछे जो मान्यता छिपी है की उपयोगकर्ता एक या अधिक सह -सबंधित फाइलों की सूचनाओं को अपने कार्य की आवश्यकता के अनुसार गणना करके पुनः इच्छित परिणाम प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार डेटाबेस प्रबधन के तहत बड़े-छोटे संस्थानों में कर्मचारियों से सबंधित एवं इसी प्रकार के कई कार्य कंप्यूटर की सहायता से किये जा सकते हैं।

शिक्षा (Education)

आज कई शिक्षण संस्थानों में कंप्यूटर को शिक्षा के एक साधन के रूप मैं उपयोग किया जाने लगा है। कंप्यूटर का सर्वाधिक उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में हो रहा हैं। मल्टीमीडिया कंप्यूटर सीडी ( कॉम्पैक्ट डिस्क ) के माध्यम से आडिओ / विडिओ आउटपुट एवं बड़े ओवर्स हेड प्रोजेक्टर्स के माध्यम से विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जा रही है।

बैंक (Banking)

बैंकों में कंप्यूटर का उपयोग आज बड़े पैमाने पर हो रहा है. ग्राहकों के खाते रखना, उनसे सबंधित विभिन्न सूचनाओं का आदान -प्रदान दूसरी शाखाओ को करना, समाशोधन ग्रहों ( क्लीयरिंग हाउस ) से चैको का निपटान आदि आज कंप्यूटर के माध्यम से ही होने लगा है।

संचार एवं प्रसारण (Communication & Broadcasting)

लम्बी दुरी तक सुचना भेजने और वहाँ से सूचनाये मंगवाने के लिए कंप्यूटर का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है। इंटरनेट क्रांति ने इस युग का स्वर्णिंम अध्याय शुरू कर दिया है। आज हम घर बैठे ही कंप्यूटर पर सारी दुनिया की जानकारी हासिल कर सकते है। इंटरनेट में टेलीफोन लाइन के द्वारा कंप्यूटर से लगे मॉडेम से हम घर बैठे ही पुरे से आसानी से जुड़ सकते हैं।

केड (Computer Aided Design)

इंजीनियर, वैज्ञानिक, डिज़ाइनर (चित्रकार ), मानचित्रकार आदि कंप्यूटर एडेड डिज़ाइन ( कैड ) सोफ्टवेरों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के नक़्शे , भवनों के डिजाइन , मशीनों का नया स्वरुप, कार का नया मॉडल डिजाइन करना आधी कार्य सरलतापूर्वक कर सकते हैं। इन डिजाइनों को त्रिआयामी ( थ्री डाइमेंशनल -3 डी ) दर्शयता के रूप मैं वास्तविक उत्पादन कैसा होगा , यह देखा जा सकता है।

चिकित्सा क्षेत्र में कंप्यूटर (Computer in Medical Field)

चिकित्सा के क्षेत्र में भी कंप्यूटर ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कम्प्यूटर का प्रयोग स्वास्थ्य संबंधित यंत्र, कंप्यूटर जनित डायग्रोस्टिक मशीनों के माध्यम से विभिन्न प्रकार जांच जैसे – आँखों की जाँच , शरीर के आंतरिक भागो की स्केनिंग , बायपास सर्जरी, पैथलॉजी टेस्ट सिटीस्केन ECG चेकअप अल्ट्रासाउण्ड आदि की जाने लगी है। इन दिनों बेक ऑफिस प्रोसेसिंग ( Back Office Processing ) का कार्य बहुत तेजी से चल रहा है।

वैज्ञानिक कार्य व अंतरिक्ष विज्ञान और मौसम की जानकारी (Scientific work space science and weather information)

कंप्यूटर के प्रयोग ने वैज्ञानिक अनुशंधान को नए आयाम प्रदान किये कंप्यूटर के प्रयोग के परिणाम स्वरुप अनुशंधान कार्यो में तेजी से विकास हुआ है क्योकि जिस डेटा का विश्लेषण करने में वैज्ञानिको को कई दिन लग जाते थे आज सुपर कम्प्यूटर्स के कारण यह कार्य कुछ ही सेकण्ड में हो जाता है आज अत्यंत तेजी से कार्य करने वाले प्रोसेसर्स का निर्माण कंप्यूटर की मदत से ही संभव हो सका है।

अंतरिक्ष की सूचनाओं को कंप्यूटर द्वारा प्राप्त करना व फिर विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालना आज कल बहुत आसान हो गया है। मौसम के नवीनतम विश्लेषण प्राप्त सूचनाओं के आधार पर किया जाता है। उसी आधार पर मौसम की भविष्यवाणी की जाती है। इनके आधार पर ही मौसम में परिवर्तनो को आका जाता है यह डेटा भविष्य के मौसम के बारे में अनुमान लगाने में सहायक होता है। अंतरिक्ष की जानकारी हवाईजहाज अथवा समुद्री जहाज के मार्ग व दिशा के पथ पर्दशक के रूप में उपयोगी होता है।

मनोरंजन (Entertainment)

मल्टिमीडिया का उपयोग महत्वपूर्ण रूप से फिल्मों तथा एनीमेशन को बनाने के लिए किया जा रहा है। कम्‍प्‍यूटर आज सबसे अधिक मनोंरजन करने वाले यंत्रो में एक हैं। यदि शिक्षित वर्ग में मतगणना करवाया जाए, तो मुझे लगता हैं कि लोगों का बहुमत कम्‍प्‍यूटरों को मनोरंजन के मुख्‍य के रूप में मत जाएगा। फिल्‍म-उघोग में कम्‍प्‍यूटर से चलचित्रों में अनेक फोटोग्राफिक प्रभाव, संगीत प्रभाव, एक्‍शन प्रभाव आदि को उत्‍पन्‍न किया जाता हैं।

कम्‍प्‍यूटर में मल्‍टीमीडिया (Multimedia) तकनीक की सुविधा से काल्‍पनिक दृश्‍य भी जीवं-से लगते हैं। जैसे- 3D स्‍टूडियो मैक्‍स (3 डी Studio Max) आदि की मदद से किया जाता हैं। संगीतकार (Musicians) एक कम्‍प्‍यूटर जिसे इलेक्‍ट्रॉनिक सिंथेसाइजर (Electronic Synthesizer) कहते हैं, को काम में लेते हैं। यह आवाज रिकॉर्ड करता हैं तथा पुरानी धुनों को मेमोरी (Memory) में भी देता हैं। कम्‍प्‍यूटर की सहायता से विभिन्‍न वाह्ययंत्रों की धुनें कृत्रिम रूप से तैयार की जा सकती हैं। प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष कम्‍प्‍यूटर आज एक बड़ा मनोरंजन का साधन है।

कंप्यूटर उपयोग के फायदे (advantages of computer)

  • आपकी उत्पादकता बढ़ाता है (Increases your productivity)
  • शारीरिक रूप से अक्षम लोगों की सहायता (Assist the physically challenged)
  • इंटरनेट से जोड़ता है (Connects to the Internet) और कार्य में तेजी लाता है।
  • डेटा को कई दिनों तक सुरक्षित स्टोरेज (Storage) कर के रख सकता है।
  • नए अविष्कारों में मदद करता है।
  • मौसम पूर्वानुमान और चिकित्सा में मद्दद करता है।
  • संगठित डेटा और सूचना (Organized Data and Information)
  • अपनी क्षमताओं में सुधार करता है (Improves your abilities)
  • आपका मनोरंजन करता है (Keeps you entertained)

दोस्तों उम्मीद करता हूँ आज की इस पोस्ट में आपको Computer Kya Hai कंप्यूटर क्या है ? Types Of Computer कंप्यूटर कितने प्रकार के होते है। कंप्यूटर कैसे काम करता है How does computer work? कंप्यूटर का विकास कैसे हुआ ? Generation Of Computer आदि कंप्यूटर से जुड़े बहुत से सवालों के जवाब मिले होंगे। फिर भी यदि आपको कंप्यूटर से जुडी और कोई जानकारी जाननी हो तो कमेंट्स जरुर करे।

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